अतृप्त वासना का भंवर-4
आपने अब तक की कहानी में पढ़ा था कि मैं सुखबीर के साथ सम्भोग करने में लगी थी.अब आगे..
करीब 2 से 5 मिनट होने चले थे और सुखबीर के शरीर से पसीना बहने लगा था. मैं अपनी मस्ती में उसे और उकसाने का काम करने लगी थी. मैं कभी उसके चूतड़ों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचती, तो कभी अपनी टांगें उसकी कमर पर लाद देती. उसने धक्कों की अपनी रफ्तार तेज कर दी और अब वो मेरी गहराई तक वार करने लगा. उसने मेरी कामोत्तजना इस प्रकार और अधिक बढ़ा दी क्योंकि अब उसका लिंग हर धक्के पर मेरी बच्चेदानी को चूम रही थी.






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